Friday, July 25, 2008

आखिरी पत्र का अंश

कहा जाता है कि इतिहास हमें सबक सिखता है. दूसरी कहावत यह भी है कि इतिहास अपने आप को कभी नहीं दोहराता. ये दोनों ही बातें सही हैं, क्योंकि अंधे होकर इतिहास की नकल करने से, या यह इंतजार करने से कि वह अपने आप को दोहरायेगा या अचल पड़ा रहेगा, हम उससे कोई बात नहीं सीख सकते. पर हम इतिहास के पीछे झांककर और उसे हरकत देनेवाली ताक़तो को समझकर ही उससे कुछ सीख सकते हैं. मगर फिर भी हमें सीधा जवाव शायद ही कभी मिलता है. कार्ल मार्क्स ने कहा है:- "इतिहास के पास दो पुराने सवालों के जवाब देने का सिर्फ एक ही तरीका है कि वह नए सवाल उठाता रहता है."


----------जवाहरलाल नेहरू, आखिरी पत्र का अंश, पृ0 1327

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