Monday, May 18, 2009

आधुनिकता की अवधारणा

अन्य अधिकांश अवधारणाओं की तरह आधुनिकता की भी कोई आत्यंतिक अथवा सर्वमान्य परिभाषा या अवधारणा संभव नहीं है। अवधारणाएँ देश-काल सापेक्ष होकर न केवल अपनी तात्विकता में बल्कि अपने व्यावहारिक प्रतिफलन में भी जटिलतर होती जाती है। आधुनिकता भी एक जटिल संकल्पना है। इसकी जटिलता का मुख्य कारण है अपनी गत्यात्मकता में इसका बहुआयामी विस्तार।

एक साधारण मनुष्य और एक बुद्धिजीवी ‘आधुनिक’ होने का अर्थ एक ही नहीं समझते। ज्ञानशास्त्रीय पद के रूप में और सामान्य जीवन व्यवहार में आधुनिकता के भिन्न अर्थ हैं। ये अर्थ परस्पर विरोधी भी हो सकते हैं। जब हम अवधारणात्मक पद के रूप में आधुनिकता का प्रयोग देखते हैं तो पाते हैं कि ज्ञान के क्षेत्र के अनुसार इसकी समझ और प्रतिमानों का विस्तार होता है। राजनीति, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र अथवा दर्शनशास्त्र आदि ज्ञान क्षेत्रों में आधुनिकता को एक ही तरीके से परिभाषित या विश्लेषित नहीं किया जाता है। इतनी ही नहीं, चूँकि आधुनिकता एक गतिशील अवधारणा है, अतः इस पर देश-काल का पर्याप्त असर पड़ता है। यूरोपीय देशों की आधुनिकता, एशियाई और अफ्रीकी देशों की आधुनिकता एक जैसी नहीं है; बल्कि उन देशों में आधुनिकता के प्रादुर्भाव के काल और कारण भी अलग-अलग हैं। संदर्भ और परिवेश बदलते ही आधुनिकता की प्रक्रिया और इसीलिए परिणामतः प्रकृति में भी फर्क आ जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि ‘‘आधुनिकता कई प्रकार की हो सकती है। जितने प्रकार के दर्शन एवं इतिहास के एकत्र बोध हैं, उतने ही प्रकार की आधुनिकता है। जितनी विविधतावाली सामाजिक अवस्थायें तथा उन्हें परिवर्तित करने की समस्यायें हैं, उतनी ही व्यापक अथवा संकीर्ण आधुनिकता है।’’77 स्पष्ट है कि आधुनिकता की संकल्पना अकारण ही जटिल नहीं है।

शब्दार्थ पर विचार करें तो ‘अधुना’ या इस समय जो कुछ है वह आधुनिक है। पर ‘आधुनिक’ का यही अर्थ नहीं है।78 हालाँकि आधुनिक शब्द की व्युत्पत्ति पाँचवी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में लैटिन शब्द ‘माॅड्र्नस’ (Modernus) से हुई है, जिसका प्रयोग औपचारिक रूप से ईसाई वर्तमान को गैर-ईसाई रोमन अतीत से अलग करने हेतु किया गया था। उसके बाद का व्यवहार प्राचीन की जगह वर्तमान को स्थापित करने हेतु किया गया, जो यूरोप में उस अवधि में उत्पन्न हो रहा था, जब नये युग की चेतना प्राचीन के साथ नये संबंध के माध्यम से नया आकार ग्रहण कर रही थी।79

आधुनिकता की शुरूआत कब और कहाँ हुई इसकी खोजबीन करते हुए किसी निश्चित तिथि की तलाश करना एक निरर्थक उपक्रम है, क्योंकि जिसे आधुनिकता कहते हैं उसे एक विशेष ऐतिहासिक प्रक्रिया में अर्जित किया गया है, न कि किसी एक विशेष तिथि से प्रायोजित। इस प्रक्रिया को विद्वान रिनेसांस-रिफार्मेशन-एनलाइटेन्मेंट-इंडस्ट्रियलाइजेशन की कड़ी में चैदहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी तक के पाँच सौ वर्षों के दौरान देखा है। आधुनिकता की शुरूआत यूरोप में हुई, इस मान्यता पर सभी एकमत हैं। इसीलिए अक्सर ‘आधुनिकीकरण को पश्चिमीकरण का पर्याय’ मान लिया जाता है।80 अमृतराय इस भ्रांति के प्रति सचेत करते हुए लिखते हैं कि ‘‘आधुनिकता के लिए हरदम योरप और अमरीका की तरफ टकटकी लगाए रहना बेतुकी बात है। आधुनिकता किसी देश या महादेश की बपौती नहीं है।’’81

देश-काल के परिवर्तित संदर्भों में आधुनिकता की प्रक्रिया और प्रकृति को समझने के लिए आधुनिकता की जैविकी को समझने की ज़रूरत है और उसकी जैविकी है: आधुनिकीकरण। आधुनिकीकरण और आधुनिकता पर्यायवाची न होते हुए भी, आधुनिकीकरण के अभाव में आधुनिकता संभव नहीं है।


77. रमेश कुंतल मेघ, आधुनिकता बोध और आधुनिकीकरण, पृ॰ 317.
78. हजारीप्रसाद द्विवेदी, हजारीप्रसाद द्विवेदी ग्रन्थावली, भाग-9, पृ॰ 359.
79. माडर्न सोशल थाॅट, ऐडिटर-विलियम वथवेट, पेज 404.
80. वही.
81. अमृतराय, सहचिंतन, पृ॰ 36.

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